हम जीते हैं वर्त्तमान मैं लिए बीते पलों की याद.....
सोंचते उन लोगो कोजो कभी हुआ करते थे हमारे साथ.......
जिए जो पल मस्ती के पकडे एक दुसरे का हाँथ!!!!!!!
ये इस्वर की श्रीस्ती,ये संसार
बस "हैं" और "थे" मैं एक पल का आभास.......
वो छड़ जब "हैं" बदल जाता हैं "थे" मैं,
लगता ये जीवन बेकार.......
की कैसी हैं ये प्रभु की दुनियाकी कैसी हैं उसकी ये लीला!!!!!!!!
शरीर हो जाता मिटटी,बस रहे जाती हैं यादे......
चालों जी लेंगे हम याद करकर क उसकी वो मीठी बातें,
कान तरस रहा उसकी वाणी की लालसा मैं.........
आखें हैं सुखा तालाब.......
मुह सुख रहा- कहे कहे के
की काश एक बार तो आओ
कर रहा ग़ालिब तेरा इंतज़ार!!!!!!
वो एक पल सोंच सोंच के माँ का आँचल,उसकी गोद
कोसे इश्वर को की बस यहीं तक था मेरा-उसका साथ??????
वो पल जब ज्योति निकल पुतले से कर देती उसको मिटटी
तब निश्वर लगता ये जीवन
जब "हैं" बदल जाता हैं "थे" मैं.......
दर्द की लहरे चीरते हुए सिने को
वो कारुद्द भाव
कहेती आँखें बेचनी से,की उसको वापिस लाओ.........
वो चलना,वो हांथो की हलचल सब हो जाता शांत......
जब "हैं" बदल जाता हैं "थें" मैं
लगता ये जीवन बेकार
चालों एक दिन हम भी जाएँगे,
तब तक जी लें इस जीवन को पूरी मस्ती से
क्यूंकिबस "हैं" और "थे" मैं एक पल का आभास
एक पल का आभास!!!!!!!!!
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